Wednesday, October 21, 2009

आज का दिन अच्छा भी था और बुरा भी , लेकिन अपने बॉस जैसे इन्सान आज तक नही देखा , बहुत ही कंजूस इन्सान है , मैंने जॉब छोड़ने का पक्का प्लान बना रखा था , बेशक मुझे कोई और जॉब न मिले , मैंने जॉब को फिर ज्वाइन तो कर लिया लेकिन मई खुस नही था बस मेरी मजबूरी थी , लेकिन मार्च के बाद इस जॉब को बिल्कुल छोड़ दुगा और घर चला जाउगा , उसके बाद गेंपक्ट मै जाना हैं , और अपने अप्प को प्रोवे करना है की हम भी किसी से कम नही है ! सभी बाते होने के बाद भी मेरे बॉस ने दीवाली भी पुरी नही दी बस माफ़ी से काम चला दिया क्यों न बोले फौर हजार रूपये जो बच रहे थे ,इन्ही को तो बणिये बोला जाता है !संजय भाई तो मुझे निकल कर बहुत ही खुस थे , वो एक बहुत चालू इन्सान है जब काम होता है तो मीठा बोलता है नही तो कोई जीये या मरे उसे कोई फरक नही पड़ता

आज क्लेअनिंग के समय मन मे विचार तोबहुत आय लेकिन बाद में पता ही नही चला की कब समय पुरा हो गया कुल मिला कर क्लेअनिंग बहुत ही अछी हुई , जब समय का पता न चले तो इसी को अधय्त्मिकता कहा जाता है मलिकi से पार्थना है की अपनी किरपा दृष्टि मुझ पे बनये रखना । थोड़ा पदाई की तरफ़ भी मेरा धयान लाये /

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